डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' बीते 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म को लोगों ने काफी पसंद किया और खूब तारीफें भी की हैं। फिल्म के साथ ही इसके म्यूजिक एल्बम ने भी लोगों का दिल जीता और ट्रेंड करता रहा। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म का एक गाना 600 साल पुराने दोहे से प्रेरित है जिसे आज भी लोग याद करते रहते हैं। इस दोहे को किसी और ने नहीं बल्कि महान संत कबीर दास ने खुद लिखा था। हालांकि इस दोहे में शब्दों को नए सिरे से गढ़ा है इरशाद कामिल ने जो अपने कमाल के गानों के लिए पहचाने जाते हैं।
हमन है इश्क मस्ताना...
मैं वापस आऊंगा फिल्म के एक गाने का टाइटल है 'इश्क मस्ताना' जो कहानी में एक मोहब्बत के रंग भरता है और प्यार को सांसारिक टुच्ची भावनाओं से इंसानी आत्मा का उत्थान कराने का अहसास करा पाता है। दरअसल ये दोहा 15वीं शताब्दी में कबीर दास ने लिखा था जिसकी पहली लाइन है... 'हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या, रहें आजाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या...।' इस पूरे दोहे में कबीर ईश्वर से अपने प्रेम और अद्वैतवाद दर्शन का प्रतिपादन करते हुए नजर आते हैं। इस दोहे की दूसरी लाइन 'जो बिछड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में हमन को इंतिजारी क्या' में कबीर बताते हैं कि जो ईश्वर के प्रेम में अत्यधिक डूब गए हैं उन्हें इस दुनिया में अपने वजूद की तलाश के लिए कोई चालाकी करने की जरूरत नहीं है। इसी मूल भाव को फिल्म मैं वापस आऊंगा में डायरेक्टर इम्तियाज अली ने दिखाने की कोशिश की है। जो इसके गाने इश्क मस्ताना में साफ नजर आते हैं।
इरशाद कामिल ने नए सिरे से गढ़े बोल
फिल्म में कबीर के इस दोहे को नए सिरे से गढ़ने का काम इरशाद कामिल ने किया है। उन्होंने इश्क मस्ताना गाने में उसी भाव को नए शब्दों और एआर रहमान के संगीत में पिरोकर कहानी में रंग भरने की सफल कोशिश की है। इस गाने में इरशाद ने पंजाबी लफ्जों का इस्तेमाल किया है लेकिन भाव किसी भी भाषा में छिपे नहीं रहे। फिल्म की कहानी पर भी ये गाना काफी गहरा असर छोड़ता है और फिल्म खत्म होने के बाद भी इसकी लाइनें दिमाग में घर कर लेती हैं। अब तक इस गाने को 13 मिलियन से ज्यादा व्यूज यूट्यूब पर मिल चुके हैं। साथ ही इसे दूसरे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी खूब पसंद किया गया है। अगर आपने भी इस गाने के लिरिक्स को ध्यान से नहीं सुना है तो आप कबीर के दोहे के साथ इस गाने के लिरिक्स भी पढ़ सकते हैं।
कबीर का पूरा दोहा...
हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या
रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या
जो बिछड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते
हमारा यार है हम में हमन को इंतिज़ारी क्या
ख़लक़ सब नाम अपने को बहुत कर सर पटकता है
हमन गर नाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या
न पल बिछ्ड़ें पिया हम से न हम बिछड़े पियारे से
उन्हीं से नेह लागी है हमन को बे-क़रारी क्या
'कबीरा' इश्क़ का माता दुई को दूर कर दिल से
जो चलना राह नाज़ुक है हमन सर बोझ भारी क्या
इश्क मस्ताना गाने के लिरिक्स
जबर जवानी बेलिया मेरी बुलाए
आजा बेईमाना, आजा बेईमाना
सबर गुलाबी झूठ है
वक्त गया जो मुड़के नहीं आना
जे मिलिया कदे लुक छिप तू हाणी
पूरियां रीझां करूं कल्ली कल्ली कल्ली
सच्ची जानी
साल शैतानी दे
हाए वे हाए चन्ना झग्गे विच बिजलियां
हाए वे हाए चन्ना झग्गे विच बिजली
आजा वे हाणिया कर ले तू गौर
पूरी करांगे शौकीनी
वे रातीं रातीं
घुप ने हनेरे यारा तांवा तांवा बलदा
बलदा ए दीवा हाणी
बलदा ए दिल दा दीवा...
हमन हैं इश्क़ मस्ताना
हमन को होशियारी क्या
हमन जब साथ हैं तेरे
हमन को इंतज़ारी क्या
हमन जलवा जवानी का
हमन तो बाज़ न आवें
हमन हैं जोश सोहबत का
हमन तो रात भर गावें
हमन हैं रंग होंठों का
हमन होंठों की सलवट हैं
हमन अंगड़ाई हैं तेरी
हमन ही तेरी करवट हैं
हमन हैं इश्क़ मस्ताना
हमन को होशियारी क्या
हमन जब साथ हैं तेरे
हमन को इंतज़ारी क्या
जे मिलिया कदे लुक छिप तू हाणी
पूरियां रीझां करूं कल्ली कल्ली कल्ली
सच्ची जानी साल शैतानी दे
मस्ताना
मस्ताना
मस्ताना
पंज ने दरिया जिन की अलग है कहानी
तेरे हुस्ना दा दरिया वी चढ़ेया तूफानी
मैं प्यासा हूं प्यासा हूं
मीठा बताशा हूं
घुल मिल तेरे में जाना
ना तुझसे अलग मैंने होना है यार
याराना है अपना पुराना
आ रातीं रातीं
घुप ने हनेरे यारा तांवा तांवा बलदा
बलदा ए दीवा हाणी
हमन हैं इश्क़ मस्ताना
हमन को होशियारी क्या
हमन जब साथ हैं तेरे
हमन को इंतज़ारी क्या
हमन जलवा जवानी का
हमन तो बाज़ न आवें
हमन हैं जोश सोहबत का
हमन तो रात भर गावें
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